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कंपनियों को बंद करने की बाधाएं होंगी खत्म , तीन श्रम सुधार विधेयकों को संसद की मंजूरी

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नयी दिल्ली : संसद ने बुधवार को 3 प्रमुख श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी दे दी। इनके तहत कंपनियों को बंद करने की बाधाएं खत्म होंगी और अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की इजाजत के बिना कर्मचारियों को हटाने की अनुमति होगी।

राज्यसभा ने बुधवार को उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस दौरान 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन के विरोध में कांग्रेस सहित विपक्ष के ज्यादातर सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

लोकसभा ने इन तीनों संहिताओं को मंगलवार को पारित किया था और अब इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार ने 29 से अधिक श्रम कानूनों को 4 संहिताओं में मिला दिया था और उनमें से एक संहिता (मजदूरी संहिता विधेयक, 2019) पहले ही पारित हो चुकी है।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने तीनों श्रम सुधार विधेयकों पर एक साथ हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘श्रम सुधारों का मकसद बदले हुए कारोबारी माहौल के अनुकूल पारदर्शी प्रणाली तैयार करना है।’ उन्होंने यह भी बताया कि 16 राज्यों ने पहले ही अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना फर्म बंद करने और छंटनी करने की इजाजत दे दी है। गंगवार ने कहा कि रोजगार सृजन के लिए यह उचित नहीं है कि इस सीमा को 100 कर्मचारियों तक बनाए रखा जाए, क्योंकि इससे नियोक्ता अधिक कर्मचारियों की भर्ती से कतराने लगते हैं और वे जानबूझकर अपने कर्मचारियों की संख्या कम स्तर पर बनाए रखते हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि यह सीमा बढ़ाने से रोजगार बढ़ेगा और नियोक्ताओं को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ये विधेयक कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेंगे और भविष्य निधि संगठन तथा कर्मचारी राज्य निगम के दायरे में विस्तार करके श्रमिकों को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आजादी के 73 साल बाद मजदूरों को अब न्याय मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के प्रावधानों के तहत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी, समय से मजदूरी की गारंटी होगी। श्रमिकों को वेतन, सामाजिक व स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी।

राष्ट्रपति से मिले विपक्षी नेता : कृषि विधेयकों को राज्यसभा में पास कराए जाने के तौर-तरीकों को लेकर विपक्षी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार शाम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला और उनसे इन बिलों को मंजूरी न देने का अनुरोध किया। इस भेेंट के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सदन में हुए हंगामे के लिए विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि इन बिलों को मंजूरी न दें और वापस सरकार के पास भेजें। उन्होंने कहा कि इन बिलों को असंवैधानिक तरीके से पास कराया गया है।

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