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MDH कंपनी के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का निधन : कभी खुद मसाले पीसकर बेचते थे, 2 हज़ार करोड़ की कंपनी के मालिक

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MDH कंपनी के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का निधन हो गया है

Mahashay Dharmpal Gulati Success Story: भारत में सबसे अग्रणी मसाला कंपनी में से एक MDH मसालों (MDH Masala) को शिखर तक पहुंचाने वाले महाशय धर्मपाल गुलाटी (Mahashay Dharmpal Gulati Dies) का निधन हो गया है. वह 98 साल के थे. आज सुबह ही उनके निधन की सूचना दी है. महाशय धर्मपाल गुलाटी के निधन पर पीएम मोदी से लेकर देश की कई बड़ी हस्तियों ने शोक जताया है. भारत और दुनिया के लिए महाशय धर्मपाल गुलाटी कोई आम शख्स नहीं थे. महाशय धर्मपाल गुलाटी ने जिस तरह से एक छोटी सी शुरुआत कर अपने मसाले को देश के घर-घर पहुँचाया, उसकी मिसालें दी आगे भी दी जाती रहेंगी. जिस एमडीएच मसाले को उन्होंने घर-घर पहुँचाया, उसका पूरा नाम ‘महाशियन दि हट्टी’ है

सियालकोट में हुआ था जन्म
मशहूर उद्योगपति महाशय धर्मपाल गुलाटी ने देश में दो हज़ार करोड़ रुपए का बिजनेस नेटवर्क बनाया. वो भी ऐसे समय जब कोई सोच भी नहीं सकता था कि पैकेट बंद मसालों का कारोबार इस हद तक कामयाबी छू सकता है. महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1918 को सियालकोट, (जो अब पकिस्तान में है) में हुआ था.

पाकिस्तान से आकर दिल्ली में तलाशा रोजगार
महाशय धर्मपाल गुलाटी की जिंदगी सियालकोट से शुरू हुई, लेकिन सियालकोट तक नहीं रुकी. भारत आज़ाद हुआ और देश के दो टुकड़े हो गये. पाकिस्तान बना. और तब पाकिस्तान के हिस्से आये सियालकोट से महाशय धर्मपाल गुलाटी का परिवार भी बेघर होकर भारत आ गए. अनगिनत परिवारों के साथ ही गुलाटी परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट था. ऐसे में महाशय धर्मपाल गुलाटी अपने भाई के साथ दिल्ली आये. यहाँ रोजगार की तलाश करने लगे.

खुद पीसे और खोखे में रखकर बेचे मसाले
इस बीच महाशय धर्मपाल गुलाटी ने तांगा चलाना शुरू किया, लेकिन तांगा चलाने में महाशय धर्मपाल गुलाटी का मन नहीं लगा. उन्होंने तांगा अपने भाई को दे दिया, और इसके बाद दिल्ली के करोल्बाद की अजमल खां रोड पर एक छोटा सा खोखा रख दिया और इसी खोखे में मसाले बेचना शुरू कर दिया. वह खुद मसाले पीसते और घर-घर भी देने जाते.

‘महाशियन दि हट्टी’ हुआ मशहूर, दो हज़ार करोड़ की कंपनी बन गई
बढ़िया क्वालिटी के चलते 60 महाशय धर्मपाल गुलाटी की मसाले की दुकान खूब मशहूर हो गई. महाशय धर्मपाल गुलाटी ने इसका नाम ‘महाशियन दि हट्टी’ रखा. इसके बाद से ही महाशय धर्मपाल गुलाटी ने कारोबार को पूरे देश में फैला दिया. गुलाटी सिर्फ पांचवीं पास थे और देश में उनका कारोबार दो हज़ार करोड़ रुपए का है. उनकी सालाना सैलरी 25 करोड़ रुपए थी.

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