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बहुत बड़ा फर्क पैदा करता एक छोटा सा बदलाव ! केके

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बदलाव :

हर एक व्यक्ति अलग दिखना चाहता हैं अपनी अलग पहचान बनाना चाहता हैं और इसके लिए वह कुछ अलग करना चाहता हैं। और हो भी क्यों नहीं क्योंकि यह तो मानव स्वभाव हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो यह दुनिया आज इतनी ख़ूबसूरत नहीं होती। हमारी ज़िन्दगी इतनी आसान नहीं होती। यह उन लोगों के सपनों की बदौलत हैं जिन्होंने इस बात पर ना केवल पूरा यक़ीन किया बल्कि अपने दृढ संकल्प के दम पर सारे दुखों को झेलकर भी उसे पूरा किया।

जैसा की यह इच्छा स्वाभाविक हैं यह उनमें भी थी। पर उनमें कुछ अलग था तो उनका यह विश्वास कि वो निश्चित ही ऐसा कर सकते हैं। और ऐसा विश्वास तभी पैदा होता हैं जब कोई व्यक्ति अपनी उस चाहत को पूरा करने के लिए ख़्वाब देखने लगता हैं और फिर उस ख़्वाब से इतना प्यार करता हैं कि जब तक ऐसा ना हो जाए वो सो नहीं पाता।

यहा सोचने वाली बात यह हैं कि हर इंसान में ऐसी चाहत तो होती हैं पर ऐसा विश्वास नहीं। क्यों यह विश्वास कुछ ही लोगों में पैदा हो पाता हैं कुछ ही लोग ऐसा कर पाते हैं और मज़ेदार बात यह हैं कि जब हम किसी से भी ऐसी बात करते हैं तो जवाब होता हैं कि क्यों नहीं! इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता! यह पूछने पर कि फिर उसने ऐसा क्यों नहीं किया कोई जवाब नहीं होता।

यक़ीन! हां…यक़ीन नहीं होता। इस बात पर यक़ीन नहीं होता कि छोटी छोटी बातों से ही बदलाव की शुरुआत होती हैं। और बदलाव ही सपने को हक़ीकत में बदलने की बुनियाद रखता हैं। परन्तु बदलाव की बात आते ही सोचने लगते हैं कि ये सब ऐसे ही नहीं होता! इससे कुछ नहीं होता! उससे कुछ नहीं होता! इस छोटी सी बात से क्या फर्क पड़ता हैं! ऐसी ही सोच रखने वाले दूसरे लोग भी इस बात का समर्थन करके उस विचार को और मज़बूत बना देते हैं।

हम अपने हालात और भाग्य को कोसते हुए समाज में दूसरों को भी यही नसीह़त देते रहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होता। परन्तु कभी भी इस बात पर गा़ैर नहीं करते कि कहीं हमारी यें छोटी छोटी बातें ही तो हमें बदलने से नहीं रोक रही हैं वास्तविकता यही हैं। हमें अपनी छोटी छोटी बातों पर ध्यान देना होता हैं… अपनी छोटी छोटी आदतों पर ध्यान देना होता हैं। पर हम तो यह सोच सोच कर कि इससे क्या फर्क पड़ता हैं उससे क्या फर्क पड़ता हैं अपने दिमाग़ में बदलाव को एक बहुत बड़ा पहाड़ बना लेते हैं!

मानों की हम जैसे है वैसे ही जीने के लिए पूरी ज़िन्दगी बाध्य हो। हमारा बदलना किसी और के हाथों में हो। और तक़दीर को कोसते हुए ज़िन्दगीभर हाथ पर हाथ रखकर समय बदलने का इन्तज़ार करते हैं! इस बात से अनजान ही बने रहते हैं कि ये सब हमारे ही हाथ में हैं किसी और के हाथों में नहीं। क्योंकि उस बनाने वाले ने इंसान के दिमाग़ को इतना ख़ूबसूरत बनाया हैं कि इंसान ने अपने दम पर ना केवल अपनी ज़िन्दगी को बल्कि इस दुनिया को भी इतना सुन्दर बना दिया। और यह सब उन सपनें देखकर उन्हें पूरा करने वालो की ही देन हैं।

ऐसा विश्वास हममे भी पैदा हो सकता है यदि हम अपने अन्दर उस तरह के बदलाव की शुरुआत करें जिस तरह का हम ख़्वाब देख रहे हैं। इस बात से ना डरे कि ऐसा कैसे होगा। हम एक के बाद एक छोटे छोटे बदलाव करके बहुत बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं। हमें तब तक लगे रहना चाहिए जब तक कि वो बड़ा फर्क महसूस ना होने लगे। इस दौरान अगर हमें किसी चीज़ की सबसे ज्यादा ज़रुरत होती हैं तो वो हैं सब्र।

चूंकि कुछ बदलाव ऐसे होते हैं जो वक़्त लेते ही हैं। अतः हमें अपनी छोटी छोटी बातों को सुधारते हुए तब तक इन्तज़ार करना चाहिए जब तक कि हमें एक बड़ा फर्क नज़र ना आने लगे। और ज़िन्दगी को बदलते हुए देखना ही ज़िन्दगी की सबसे बड़ी खुशी हैं।

केके
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