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मनोज्ञान – ‘ज़िद्दी होना बुरा नहीं है, लेकिन ‘ज्ञान’ बिना ज़िद्दी होना बहुत बुरा है!’ केके

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Article in Hindi : दो मुसाफ़िर नदी के किनारे पहुंचे। उन्हें नदी पार जाना था। उन्होंने देखा की तट पर एक नौका पड़ी है। उस नौका को देखकर दोनों मुसाफ़िर सोच मे पड़ गए। एक ने कहा, “नाविक तो नहीं है पर नौका पड़ी है। नदी पार कर लेंगे।” दूसरे ने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता। नदी पार करने के लिए केवल नौका ही पर्याप्त नहीं है, नाविक भी चाहिए। पतवार की भी जरुरत है।”

Article in Hindi (News paper Article ) :

इस पर पहला बोला, “यह कैसे हो सकता है। हम तो हमेशा से सुनते आए हैं की नदी पार करने के लिए सिर्फ एक नाव का होना काफ़ी है। नौका पड़ी है और क्या चाहिए!” और ऐसा कहकर उसने, उसके बुद्धिमान साथी के मना करने के बावज़ूद, बिना सोचे समझे नौका खोल दी। अकेला ही उसमें बैठ गया। इतने में ही एक हिलोर आ गई। और नाव आगे चल पड़ी। पानी का बहाव तेज़ था। नौका डगमगाने लगी। कुछ दूर जाकर नौका उलट गई। ज़िद्दी मुसाफिर पानी में डूब गया। ‘ज्ञान’ के बिना ज़िद्दी होने की क़ीमत उसे अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी! इस प्रकार जो व्यक्ति बिना ‘ज्ञान’ के ज़िद करता है उसके लिए तैराने वाली वस्तु भी डुबोने वाली बन जाती है।

Article in Hindi (Top Article ) :

इसी तरह आम तौर पर कई बार ये सुनने में आता है कि, ‘फलां व्यक्ति बहुत ज़िद्दी है’ या ‘ये उसकी ज़िद है!’ ज़िद करना अथवा ज़िद्दी होना बुरा नहीं है पर जिस बात की ज़िद होती है उसके बारे में सम्पूर्ण ज्ञान के बिना ज़िद करना कई बार बहुत बुरा हो सकता है। इसलिए कुछ भी करने या पाने की ज़िद के लिए मन को पूरी तरह से तैयार होकर ज़िद करनी चाहिए। जिस मन को ज्ञान न हो और वो कुछ भी करने या पाने की ज़िद करता हो तो फिर उसे किसी भी तरह की क़ीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए! अतः ज़िद करना बुरा नहीं है परन्तु बिना ‘ज्ञान’ के ज़िद करना बहुत बुरा है!

केके
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