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मनोज्ञान – ‘मनोज्ञान’ की रोशनी पूरे विश्व को चमका देगी!’ केके

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20 October 2020 inspirational quotes in hindi , inspirational quotes | positive quotes | Today’s Motivation | success quotes | Manogayan KK | मनोज्ञान
Manogayan KK Hindi, inspirational quotes , 20 October 2020 positive quotes: आज हम आपको Today’s Motivation quotes मनोज्ञान , success quotes बताने वाले हैं।

‘मनोज्ञान’ अर्थात मन का ज्ञान। जब तक मन का ज्ञान नहीं, तब तक रोशनी नहीं। ऐसा क्यूँ! ऐसा इसलिए कि जब तक किसी को मन का ज्ञान नहीं हो जाता तब तक उसे ये समझ ही नहीं आता कि वो जैसा है, वैसा क्यों है। मतलब कि उसका जिस तरह का व्यवहार (बिहेवियर) है वो इस तरह का कब और कैसे बन गया। उससे वो क्यों हो जाता है जो वो नहीं करना चाहता है और वो जो करना चाहता है वो क्यों नहीं कर पाता है! ऐसे ही न जाने कितने तरह के सवाल होंगे जो इंसान का मन ख़ुद से पूछता रहता होगा। और ऐसे ही अनगिनत सवाल तब तक करता ही रहेगा जब तक कि उसे अपने मन का ज्ञान नहीं हो जाता। अतः जब तक किसी भी व्यक्ति को अपने मन का ज्ञान नहीं हो जाता तब तक उसका मन अँधेरे में ही भटकता रहता है। जैसा कि पिछले कई सालों में अनगिनत लोगों की पर्सनल काउंसलिंग से पता चला है, हर एक ने न जाने कितने ही मोटिवेशनल वीडियोज़ देख-सुन डाले परन्तु फिर भी ज़िन्दगी नहीं बदली! ये बात अपने आप स्पष्ट कर रही है कि किसी भी माध्यम से पैदा होने वाली थोड़ी देर की ऊर्जा (एनर्जी) ज़िन्दगी नहीं बदला करती है! वो थोड़ी देर की ऊर्जा (एनर्जी) थोड़ी देर के लिए ऊर्जावान (एनर्जेटिक) कर सकती है पर बुद्धिमान नहीं बना सकती क्योंकि बुद्धिमान बनने के लिए भी मन का ज्ञान अर्थात ‘मनोज्ञान’ ज़रूरी है! और बुद्धिमान बने बिना कोई भी आत्म-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) नहीं रह सकता और बिना आत्म-प्रेरणा (सेल्फ़ मोटिवेशन) के कोई भी ज़िन्दगी बदल नहीं सकती। अतः किसी भी ज़िन्दगी को बदलने के लिए ज़रूरी है आत्म-प्रेरणा (सेल्फ़ मोटिवेशन) और आत्म-प्रेरणा (सेल्फ़ मोटिवेशन) के लिए ज़रूरी है मन का ज्ञान अर्थात ‘मनोज्ञान!’

एक फ़क़ीर था। वह मनुष्य की मुक्ति के सहज उपाय बताने के लिए काफ़ी मशहूर था। एक बार उसने अपना ऐसा ज्ञान प्राप्त करने का दिलचस्प संस्मरण सुनाया था। वो संस्मरण इस प्रकार है – एक बार अपने गुरु से शिक्षा ग्रहण करते हुए उसे अधिक रात हो गयी थी। उसने अपने गुरु से कहा कि अँधेरे की वजह से रास्ता नहीं सूझ रहा। मंदिर की सीढ़ियां कैसे उतरूंगा। गुरु ने उसके हाथ पर एक दीया रख दिया। लेकिन जैसे ही वह पहली सीढ़ी पर पैर रख कर नीचे उतरने लगा, गुरु ने दीपक को फूँक मार कर बुझा दिया। उसने गुरु से निवेदन किया, “मज़ाक न करें गुरुदेव। अँधेरा गहरा है। सीढ़ियाँ कैसे उतरूंगा?” इस पर गुरु ने कहा, “अँधेरे में ही रास्ता खोजो। अँधेरे में टकराओगे, गिरोगे, कोई फ़िक्र नहीं। लेकिन इस असुविधा के बीच ही तुम्हे ज्ञान मिलेगा। इस दीपक के सहारे तुम गिरोगे तो नहीं, लेकिन तुम्हें ज्ञान प्राप्त नहीं होगा। इसलिए मैंने तुम्हारे हाथ पर रखा दीपक बुझा दिया है।”

केके
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