Hamara Today
Hindi & Punjabi Newspaper

मनोज्ञान – ‘मन की गुणवत्ता ही ज़िन्दगी की गुणवत्ता तय करती है!’ केके

0

‘मन की गुणवत्ता ही ज़िन्दगी की गुणवत्ता :

हर एक ज़िन्दगी बेहतरीन पाना चाहती है। ज़िन्दगी हर एक चीज़ उच्चतम गुणवत्ता की हासिल करना चाहती है। इसी ज़द्दोज़हद और ज़िन्दगी के बीच के संघर्ष को समझने में ही इंसान का वक़्त निकल जाता है। परन्तु कुछ ही लोग वक़्त रहते इस बात को समझ पाते हैं कि बेहतरीन को पाने के लिए मन को बेहतरीन बनाना ही पड़ता है क्यूँकि मन की गुणवत्ता (क्वॉलिटी ऑव माइंड) ही ज़िन्दगी की गुणवत्ता (क्वॉलिटी ऑव लाइफ़) तय करती है!

सिकंदर और उसके गुरु अरस्तू एक बार घने जंगल से गुजर रहे थे। उन्हें मार्ग में उफनता हुआ एक बरसाती नाला मिला। गुरु-शिष्य में इस बात को लेकर बहस होने लगी की इसे पहले कौन पार करे। वह नाला गहरा और अनजान था। कुछ सोचकर सिकंदर इस बात पर अड़ गया की नाले को पहले वह स्वयं पार करेगा, इसके उपरांत गुरुदेव नाला पार करेंगे। थोड़े विवाद के बाद अरस्तू ने सिकंदर की बात मान ली। पहले सिकंदर ने ही नाला पार किया, फिर अरस्तू ने। पर दूसरे किनारे पर पहुंचकर पुनः विवाद उठा। अरस्तू ने पूछा, “तुमने मेरी बेइज्जती क्यों की?” सिकंदर विनम्रतापूर्वक बोला, “ऐसा न कहे गुरुवर! ऐसा करना मेरा कर्तव्य था।” अरस्तू ने पूछा, “क्यों ?” इस पर सिकंदर ने कहा, “क्योंकि अरस्तू रहेगा, तो हजारो सिकंदर तैयार हो सकते हैं, पर सिकंदर तो एक भी अरस्तू नहीं बना सकता।” अरस्तू इस उत्तर से सिकंदर के प्रति और भी गहरा स्नेह महसूस करने लगे।

सिकंदर के मन कि गुणवत्ता (क्वॉलिटी ऑव माइंड) ने ही सिकंदर को महान बना दिया था। सिकंदर के मन का यह महान भाव,”अरस्तू रहेगा तो हजारो सिकंदर तैयार हो सकते हैं, पर सिकंदर तो एक भी अरस्तू नहीं बना सकता!” ही यह बताता है कि वो क्या देखता था, क्या सोचता था और उसकी ज़िन्दगी पूरे संसार के सामने इस बात की ग्वाह बन गयी।

केके
WhatsApp @ 9667575858

Hamara Today न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें.

Leave A Reply

Your email address will not be published.