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मनोज्ञान – ‘एक ‘ग़रीब’ जब ठान लेता है, तो ‘ग़रीबी’ को जलाकर राख कर देता है!’ केके (KK)

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KK Artical in Hindi :
इंसान चाहे कोई भी हो अगर ठान ले तो क्या कुछ नहीं बदल सकता। यूँ तो हमारे सामने कई ऐसे लोगों की मिसालें हैं जिन्होंने कुछ करने की ठानी और बहुत ही बुरे हालात को बदलकर दिखाया। परन्तु इनमें से एक ऐसी मिसाल जिसके बारे में सुनते-पढ़ते ही ऐसा लगता है मानों देर सिर्फ़ इंसान के ठान लेने की ही होती है। अब्राहिम लिंकन! कौन नहीं जानता कि उनका जन्म ग़रीबी में हुआ लेकिन ग़रीबी भी उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से नहीं रोक पायी। और ग़रीबी भी उनको राष्ट्रपति बनने से क्यों नहीं रोक पायी इस बात का पता उनके साथ हुए इस किस्से में उनकी सोच से पता चलता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के पास एक नौजवान आया – जो बेकारी के कारण भीख मांगने की सोच रहा था। उसने लिंकन से आर्थिक सहायता मांगी। उसने कहा, “मैं बहुत गरीब हूँ। ईश्वर ने मुझे कुछ भी तो नहीं दिया है, दया करें।” लिंकन ने उसको ऊपर से नीचे तक देखा। उन्होंने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हें दो हजार डॉलर दे सकता हूँ। तुम अपने दोनों पैर मुझे दे दो।” युवक बोला, “राष्ट्रपति जी ! पैर तो मैं नहीं दे सकता क्योंकि मैं फिर चलूंगा कैसे ?” लिंकन बोले, “अच्छा, यदि पैर नहीं दे सकते तो अपने दोनों हाथ दे दो।

केके (KK Artical in Hindi) :
मैं तुम्हें दस हजार डॉलर दे देता हूँ।” युवक बोला, “सर! दस हजार तो क्या यदि कोई मुझे पचास हजार डॉलर भी दे तो भी मैं अपने हाथ उसे नहीं दे सकता, हाथ कटवाने पर फिर मेरे पास रह ही क्या जायेगा?” लिंकन अब थोड़ा मुस्कराए, उन्होंने कहा, “अच्छा ठीक है, हाथ नहीं दे सकते, न दो। ऐसा करो कि अपनी दोनों आँखें दे दो। मैं अभी तुम्हें एक लाख डॉलर नकद दिलवा देता हूँ।”युवक ने कहा, “महामहिम! आप भी कैसी बातें करते हैं। कभी हाथ मांगते हैं। कभी पैर मांगते हैं।

इनकी कीमत डॉलरों में आंकते हैं। क्या कोई अपने हाथ-पैर, आँखें दे सकता है? आँखें दे दूंगा तो अंधा नहीं हो जाऊंगा।” अबकी बार लिंकन ठहाका मारकर हंसे और बोले, “देखो युवक! जब प्रभु ने तुम्हें इतनी कीमती चीजें दी हुईं हैं तो तुम ग़रीब कैसे हुए? क्या तुम्हें यह कहना शोभा देता है कि तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है? जाओ मेहनत-मजदूरी करो। मैं स्वयं मजदूरी करता था। ये हाथ दया मांगने के लायक नहीं हैं। या तो इन्हें प्रभु की प्रार्थना के लिए उठाओ या फिर दूसरों पर दया करने के लिए।”

KK Artical in Hindi :
अतः अब्राहम लिंकन अपनी नौजवानी में बहुत ग़रीब थे पर उन्होंने ठाना और वे एक ग़रीब आदमी से अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए। उन्ही की तरह यदि एक इंसान ठान ले तो कुछ भी कर सकता है। तमिल कवि तिरुवल्लुवर के शब्दों में, “‘मैं गरीब हूँ’ यह कहकर किसी को पाप कर्म में लिप्त नहीं होना चाहिए।

केके (KK)
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