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मनोज्ञान – ‘ध्यान, ज्ञान, साधना, योग, मोक्ष, आध्यात्म, कुंडलिनी अथवा बह्मांडीय या पराभौतिक शक्ति का एकमात्र मार्ग है ‘मनोज्ञान’!’ केके

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25 October 2020 Today’s Motivation | inspirational quotes in hindi , inspirational quotes | positive quotes | Today’s Motivation | success quotes | Manogayan KK | मनोज्ञान

Manogayan KK Hindi, inspirational quotes, 25 October 2020 positive quotes: आज हम आपको Today’s Motivation quotes ‘मनोज्ञान , success quotes बताने वाले हैं।

एक बार ज्ञानेश्वर महाराज सुबह-सुबह नदी तट पर टहलने निकले। उन्होंने देखा कि एक लड़का नदी में गोते खा रहा है। नज़दीक ही एक संन्यासी आंखें मूंदे बैठा था। ज्ञानेश्वर महाराज तुरंत नदी में कूदे, डूबते लड़के को बाहर निकाला और फिर संन्यासी को पुकारा। संन्यासी ने आंखें खोलीं तो ज्ञानेश्वर जी बोले, ” क्या आपका ध्यान लगता है?” संन्यासी ने उत्तर दिया, “ध्यान तो नहीं लगता, मन इधर-उधर भागता है।” ज्ञानेश्वर जी ने फिर पूछा, “लड़का डूब रहा था, क्या आपको दिखाई नहीं दिया?” उत्तर मिला, “देखा तो था ,लेकिन मैं ध्यान लगाने की कोशिश कर रहा था।” ज्ञानेश्वर जी ने समझाया, “आप ध्यान में कैसे सफल हो सकते हैं! प्रभु ने आपको किसी की सेवा करने का मौक़ा दिया था।

यही आपका कर्तव्य भी था। यदि आप पालन करते तो ध्यान में भी मन लगता। प्रभु की सृष्टि, प्रभु का बगीचा बिगड़ रहा है। बगीचे का आनंद लेना है तो बगीचे को संवारना सीखें। यदि आपका पड़ोसी भूखा सो रहा है और आप पूजा-पाठ करने में मस्त हैं तो यह मत सोचिए कि आपके द्धारा शुभ कार्य हो रहा है क्योंकि भूखा व्यक्ति उसी की छवि है जिसे पूजा-पाठ करके आप प्रसन्न करना या रिझाना चाहते हैं। जिसे ध्यान, ज्ञान, साधना, पूजा-पाठ करके आप प्रसन्न करना चाहते हैं, क्या वह सर्वव्यापक नहीं है?”

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ज्ञानेश्वर जी का ये सवाल आज के हर उस व्यक्ति के लिए भी है जो उस संन्यासी की तरह ही ध्यान, ज्ञान, साधना, योग, मोक्ष, आध्यात्म अथवा कुंडलिनी शक्ति की कोशिश में लगा है! अगर इस बात को बहुत गहराई से जानना-समझना चाहें तो हर उस इंसान की मनोदशा का पता करें जो ऐसा करने की कोशिश कर रहा है। पिछले कई सालों से की जा रही व्यक्तिगत काउंसलिंग (पर्सनल काउंसलिंग) से इस बात का अनुभव हुआ है कि लोगों द्वारा लंबे समय से ख़ूब ‘ध्यान’ (मेडिटेशन) करने की कोशिश करते रहने के बावज़ूद ‘ध्यान’ नहीं हो पाता है। यही हाल ज्ञान, साधना, योग, आध्यात्म अथवा कुंडलिनी शक्ति जगाने की कोशिश करने वालों का है। और इसका जवाब ये है कि जब तक मन उसके लिए तैयार नहीं होता अर्थात ‘मन’ ध्यान, ज्ञान, साधना, योग, मोक्ष, आध्यात्म अथवा कुंडलिनी शक्ति को जगाने की अवस्था में नहीं पहुँच जाता तब तक ऐसा नहीं हो पाता है! अतः मन को ऐसी अवस्था में पहुँचाने के लिए ज़रूरी है ‘मनोज्ञान!’

केके
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