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मनोज्ञान – ‘मन वो जिन्न है जिसको अपनी मुट्ठी में ले लेने पर पूरा विश्व लाकर दे सकता है!’ केके

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14 October 2020 KK Manogayan| Article 14 October 2020 in Hindi | Today KK Article

सिकन्दर के पिता के पास किसी राजा ने एक घोड़ा भेजा, साथ में यह भी कहलवाया कि इसकी चाल सीधी करके भेज दो। घोड़ा अति चंचल था। सब घुड़सवारों ने जवाब दे दिया। सिकन्दर के पिता उस घोड़े को यों ही वापस भेजने लगे। यह देखकर सिकन्दर पिता से बोला, “मैं इस पर सवार होकर इसे सीधा करूँगा।” पिता ने समझाया, “बेटे, क्या तेरी मृत्यु आई है?” सिकन्दर ने कहा, “अब्बा, एक दिन मरना तो निश्चित है, फिर अपयश से बेहतर है यश के साथ मरना।” कहते-कहते उसने घोड़े की बागडोर अपने हाथ में थाम ली और ग़ौर किया कि यह इतना कूदता क्यों है? मालूम हुआ की दरअसल वह अपनी छाया देखकर चंचल हो जाता है और इसी कारण सवार को चढ़ने नहीं देता।
14 October 2020 KK Manogayan| Article 14 October 2020 in Hindi | Today KK Article | Manogayan

अतः सिकन्दर ने घोड़े का मुँह सूर्य की ओर कर दिया। वह ठहर गया। सिकन्दर झटपट छलांग लगाकर उस पर सवार हो गया। घोड़ा बली था, अतः बेहद वेग के साथ दौड़ा। सिकन्दर ने परवाह किए बगैर बाग ढीली छोड़ दी। अंततः घोड़ा दौड़ता-दौड़ता थक गया तो सिकन्दर ने उसकी बाग पीछे खींच ली और चाबुक मार कर लौटा लाया। पसीने से तर घोड़ा एकदम सीधा हो गया। बाद में सिकन्दर, शक्ति और समझ के अपने इन्हीं गुणों के चलते, एक विश्व विख्यात बादशाह बना!
जैसे सिकन्दर ने अपनी समझ से उस घोड़े की चाल सीधी कर उसे अपने क़ाबू में कर लिया, ऐसे ही यदि कोई इंसान अपने मन की चाल को सीधी कर अपने मन को क़ाबू कर ले तो वह कुछ भी हासिल कर सकता है। सिकन्दर ने अपनी सूझबूझ से घोड़े की चंचलता को समझा और फिर अपनी समझ से उसे अपनी गिरफ़्त में कर लिया। इसी तरह जो कोई अपने मन की चंचलता को समझ उसे साधना शुरु कर दे तो वह अपने मन को अपनी गिरफ़्त में ले अपनी मानसिक शक्ति से कुछ भी कर सकता है!
14 October 2020 in Hindi Manogayan

केके
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