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मनोज्ञान – ‘मेहनत ही सच्चा सुख महसूस करवा सकती है!’ केके

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मेहनत ही सच्चा सुख महसूस करवा सकती है

वह स्कूल का एक मेधावी छात्र माना जाता था। एक बार स्कूल में कहानी प्रतियोगिता आयोजित की गई। कहानी लिखने के लिए महीने भर का समय दिया गया। केवल उस छात्र को ही नहीं, बल्कि उसके साथियों तथा अध्यापकों को भी विश्वास था की पुरस्कार उसी को मिलेगा। परन्तु उस छात्र को केवल एक कहानी लिखने के लिए महीने भर का समय देना भारी मूर्खता प्रतीत हुई। जब दो दिन रह गए तो उसने आनन-फानन में एक कहानी लिखी और दे दी।

जिस दिन पुरस्कार की घोषणा होनी थी उस दिन वह छात्र बड़े उल्लास के साथ स्कूल पंहुचा। परिणाम घोषित हुआ। प्रथम पुरस्कार उसे नहीं किसी अन्य छात्र को मिला था। उदास होकर वह घर चला गया और रोने लगा। बड़ी बहन ने असलियत भांप ली और बोली, “पुरस्कार नहीं मिला, इसलिए रो रहा है ना? यह तो मैं पहले ही जानती थी।

महीने भर का काम तू दो दिन में करेगा तो और क्या होगा??” फिर वह स्नेहपूर्वक बोली, “अब रोने से क्या लाभ? अगर सचमुच तुझे पराजय का दुःख है तो इसे आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी मान ले। भविष्य में इस भूल को मत दोहराना।” बड़ी बहन की सीख ने उसकी आंखें खोल दी। आगे चलकर यही छात्र अर्नेस्ट हेमिंग्वे के नाम से विश्व-प्रसिद्ध अमरीकी साहित्यकार हुआ। बाद में उसे साहित्य का नोबेल पुरस्कार भी मिला।

इस तरह किसी भी दुःख से लड़ने का सबसे ताक़तवर हथियार अगर कुछ है तो वो है मेहनत! जब कोई इस बात को समझ ले और किसी भी दुःख-दर्द से लड़ने के लिए सबकुछ भूलकर डूब जाये उस काम में जिससे मन प्रेम करता हो तो उसे ऐसे सच्चे सुख का अहसास होगा जैसे कि उसने संसार के सारे दुःखों को पार कर लिया हो। हर ज़िन्दगी के सामने कोई न कोई, किसी न किसी तरह की चुनौती हमेशा रहती है लेकिन जिस किसी भी इंसान को मेहनत करने में मज़ा आने लगता है वो सच्चा सुख महसूस करने लगता है! और ऐसा सच्चा सुख इंसान को कहाँ से कहाँ ले जा सकता है ये हमने अर्नेस्ट हेमिंग्वे के नाम से विश्व-प्रसिद्ध अमरीकी साहित्यकार की ज़िन्दगी में देख ही लिया।

केके
WhatsApp @ 9667575858

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