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मनोज्ञान – ‘हर मन में एक अद्भुत शक्ति है!’ केके

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बहुत समय पहले की बात है। जापान के एक छोटे-से गांव में एक किसान रहता था। किसान बहुत ग़रीब था। उसके परिवार में उसकी पत्नी और चार बेटे थे। खेत के नाम पर उसके पास थोड़ी-सी कच्ची ज़मीन थी। पूरा परिवार अपने उस छोटे से खेत में जी-जान से मेहनत करता था। छोटा बेटा खेत में काम करने से जी चुराता था। माता-पिता के समझाने पर वह काम करने की कोशिश भी करता था तो जल्दी से थक जाता था।

“वह शरीर से कमज़ोर है। इससे काम मत कराओ।” माँ प्रायः उसका पक्ष लेती थी।
“पर इसे कुछ तो करना चाहिए। यदि कुछ नहीं सीखेगा तो बड़ा होकर अपना पेट कैसे भरेगा?” किसान ने सोचा और उसे गांव के मंदिर के बुज़ुर्ग पुजारी के पास भेज दिया जिससे वह मंदिर के काम में उनकी सहायता कर सके। पुजारी बाबा जो कुछ कहते, वह सब काम कर देता था, पर जब खाली समय में वे उसे पढ़ने के लिए कहते तो वह पढ़ने के स्थान पर बिल्लियों के चित्र बनाता था। बिल्लियों के चित्र इतने सजीव थे कि देखने वाले दंग रह जाते थे। बैठी बिल्ली, सोती बिल्ली, हंसती बिल्ली, दौड़ती बिल्ली… बिल्लियों की तरह-तरह की मुद्रायें वह बनाता था। एक दिन पुजारी कहीं बाहर गए हुए थे और उसने मंदिर की दीवारों पर ही छोटी-बड़ी बिल्लियां बना दीं। पुजारी जी ने लौटने पर जब मंदिर की दीवारों पर बिल्लियों के चित्र देखे तो उन्हें बहुत क्रोध आया और गुस्से से उसे मंदिर से बाहर निकाल दिया।

लड़के ने सोचा, “यदि घर वापस जाऊँगा तो पिताजी नाराज होंगे, क्यों न शहर के मंदिर जाकर वहां के पुजारी के काम में हाथ बटाऊँ?” लड़का शहर के मंदिर पहुंच गया। तब तक रात हो गई थी। पुजारी भी वहां नहीं थे। केवल एक चूहा वहां उत्पात मचा रहा था। वास्तव में वह चूहा गौबलिन राक्षस था जिसे आसुरी शक्ति प्राप्त थी। उस मंदिर पर गौबलिन का अधिकार था। लड़का काफी देर तक पंडित जी की प्रतीक्षा करता रहा। जब वे नहीं आए तो वह अपनी आदत के अनुसार मंदिर की दीवारों पर बिल्लियों के चित्र बनाने लगा। देखते ही देखते उसने पूरी दीवारें बिल्लियों के चित्रों से भर दीं। चित्र बनाते बनाते वह सो गया। उसे पता नहीं चला आधी रात के समय उसे बिल्लियों और चूहों के लड़ने की आवाज़ आई। लड़का डर के मारे आंखें मूंदे पड़ा रहा। सुबह जब वह उठा तो देखा की गौबलिन चूहा फर्श पर मरा पड़ा था।

पुजारी जी ने भी चूहे को मरा पाया तो वे बड़े खुश हुए। सभी भक्तगण गौबलिन के आतंक से दुखी थे। उसके मरने का समाचार सुनकर वे मंदिर में इकट्ठा हो गए। सभी एक दूसरे से पूछ रहे थे “पर यह मरा कैसे ?” तभी पुजारी जी की नजर मंदिर की दीवारों पर बने बिल्ली के चित्रों पर पड़ी। पुजारी ने आश्चर्य से कहा ,”अरे दीवारों पर ये बिल्लियां कहां से आ गई?” डरते-डरते बालक बोला, “इन्हें मैंने बनाया है। पुजारी ने लड़के की पीठ ठोकते हुए कहा , “शाबाश बेटा! तुमने इतनी सुन्दर और जीती-जागती बिल्लियां बनाई हैं कि गौबलिन चूहा इन्हें असली समझकर डरकर मर गया।” बचपन में जीती-जागती सी बिल्लियों के चित्र बनाने वाला वह लड़का बड़ा होकर जापान का मशहूर चित्रकार बना।

केके
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