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अब SMS के जरिए भी भर सकेंगे जीएसटी रिटर्न, जानिए क्‍या है तरीका

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शून्य टैक्स देने वाले भी अगर हर महीने अपना जीएसटी रिटर्न के बारे में फॉर्म नहीं भरते थे तो हर दिन उन्हें 20 रुपये दंड लगता था

कोरोना वायरस लॉकडाउन में केंद्र सरकार ने जीएसटी रिटर्न भरने वाले लोगों को एक बड़ी राहत दी है। अब शून्य मासिक जीएसटी रिटर्न भरने वाले टैक्सपेयर एमएमएस के जरिए इसे भर सकते हैं। सरकार के इस कदम से करीब 22 लाख पंजीकृत टैक्सपेयर्स को फायदा होगा।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा, ‘टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिये बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें एसएमएस के जरिये जीएसटीआर-3बी फार्म में शून्य जीएसटी मासिक रिटर्न भरने की अनुमति दे दी है।’ ऐसा नहीं होने पर उन्हें साझा पोर्टल पर अपने एकाउंट पर ‘लॉग इन’ करना होता और उसके बाद हर महीने रिटर्न फाइल करना होता।

इस तरीके से भरें अपना जीएसटी रिटर्न शून्य रिटर्न आगामी महीने की पहली तारीख को 14409 पर एसएमएस कर भेजा जा सकता है।

इस सुविधा के तहत जिन इकाइयों का फार्म जीएसटी-3बी में सभी सारणी में शून्य या कोई ‘एंट्री’ नहीं है, वे पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग कर एसएमएस के जरिये रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

उक्त रिटर्न का सत्यापन पंजीकृत मोबाइल नंबर आधारित वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सुविधा के जरिये होगा। सीबीआईसी ने कहा कि जिन टैक्सपेयर्स की देनदारी शून्य है, उन्हें जीएसटी पोर्टल पर ‘लॉग ऑन’ करने की जरूरत नहीं है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने केंद्रीय जीएसटी नियमों में नया नियम पिछले महीने पेश किया था। इसके तहत शून्य रिटर्न एसएमएस सुविधा के जरिये भरने की अनुमति करदाताओं को दी गयी थी। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत 1.22 करोड़ इकाइयां पंजीकृत हैं।

पहले हरेक टैक्सपेयर्स को अगर उनकी टैक्स राशि शून्य है तब भी उन्हें मंथली रिपोर्ट दाखिल करने के लिए जीएसटीएन के पोर्टल पर प्रत्येक माह जीएसटीआर-3बी फार्म के अनेक कॉलम को भरना होता था। अब वे अपने मोबाइल से 14409 पर एसएमएस करेंगे तो उन्हें एक ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे कन्फर्म करने पर उनकी विवरणी दाखिल समझी जाएगी।

कम्पोजिशन स्कीम में शामिल टैक्सपेयर्स के अतिरिक्त हर करदाता को जीएसटीएन पोर्टल पर जीएसटीआर-3बी फार्म भरना अनिवार्य है, जिसके आधार पर वे टैक्स का भुगतान करते हैं।

अगर वे निर्धारित तारीख तक टैक्स का भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें 50 रुपये प्रतिदिन और शून्य टैक्स देने की स्थिति में भी 20 रुपये प्रतिदिन की दर से दंड का भुगतान करना होता है।

इसके साथ ही बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी भी हैं, जिन्होंने रजिस्टर्ड तो करा लिया परंतु उनकी कोई टैक्स नहीं देना है, फिर भी उन्हें मासिक रिटर्न के बारे में फॉर्म भरना होता था।

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