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किसानों पर लाठीचार्ज मामले में ‘अपनों’ से ही घिरी सरकार, सांसदों ने कहा जांच हो

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सांसद बृजेंद्र सिंह, धर्मबीर सिंह, जजपा नेता दिग्विजय चौटाला किसानों के साथ डटे

कुरुक्षेत्र में बृहस्पतिवार को किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद सत्तारूढ़ भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार कठघरे में आ गई है। विपक्षी दल कांग्रेस व इनेलो ही नहीं, खुद सरकार के सांसद और वरिष्ठ नेता भी किसानों के समर्थन में आ डटे हैं। लाठीचार्ज के विरोध में सबसे पहले भाजपा की गठबंधन सहयोगी जननायक जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह चौटाला ने आवाज उठाई। दिग्विजय ने ट्वीट करके कहा कि किसानों पर हुई लाठीचार्ज की घटना निंदनीय है। किसानों को हुई पीड़ा को हम अपनी पीड़ा मानते हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। दिग्विजय के बड़े भाई दुष्यंत सिंह चौटाला खट्टर सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं।

इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता कैप्टन अभिमन्यु ने ट्वीटर हेंडल पर लिखा कि कुरुक्षेत्र में किसानों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने की तस्वीरें देखकर बहुत दुख हुआ। यह घटनाक्रम नहीं होना चाहिए था। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व राज्य के गृह मंत्री अनिल विज ने इस पर संज्ञान लेने का आग्रह किया है। हिसार के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को अपनी मांग उठाने का अधिकार है। वे यही नहीं रुके। उन्होंने सरकार द्वारा कोरोना महामारी के बहाने किसानों के कार्यक्रम पर रोक लगाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है। बृजेंद्र सिंह ने कहा कि लाठीचार्ज कर कोरोना संबंधित रोक का उदाहरण स्थापित करने की कोशिश निंदनीय है। मुझे उम्मीद है कि सरकार इस मामले की जांच कराएगी और किसानों से बात करके उनकी शंकाओं को दूर करेगी।

भिवानी-महेंद्रगढ़ सांसद चौ़ धर्मबीर सिंह ने कहा कि किसान हमारा अन्नदाता है। सुबह सवेरे उठते ही अन्न, सब्जी, फल, दूध आदि की बड़े बुजुर्गों, बच्चों सहित हर इंसान को जरूरत पड़ती है। प्रकृति की मार ने किसानों की कपास व मूंग की फसल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। ऊपर से कोविड जैसी महामारी ने देश और दुनिया को बर्बादी के कगार पर ला दिया है। सांसद ने कहा कि ऐसे हालात में किसानों की बात न सुनकर उनके ऊपर लाठीचार्ज की कार्रवाई सहन करने लायक नहीं है। ऐसे वक्त में कोई समस्या पैदा न हो, यह सरकार का फर्ज बनता है। सरकार को चाहिए कि किसान यूनियन के नेताओं के साथ मिल-बैठ कर बात की जाए ताकि उनकी समस्या का हल निकाला जा सके। बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने ट्वीट करके कहा कि जब पूरा देश घरों में बैठा था तो किसान खेतों में काम कर रहे थे। अब उन्हीं किसानों की आवाज दबाने को उन पर लाठीचार्ज हो रहा है।

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